''शूरवीरों का सम्‍मान''

दिनांक 16 जुलाई 2018 की शाम जबलपुर के मानस भवन में गृह मंत्री श्री भूपेन्‍द्र सिंह एवं पुलिस महानिदेशक श्री ऋषि कुमार शुक्‍ला द्वारा मध्‍यप्रदेश के 7 पुलिस अधिकारियों को उनके वीरता, प्रशिक्षण, अपराध अनुसंधान, सामुदायिक पुलिसिंग, यातायात प्रबंधन और अपराधों के खिलाफ मुहिम में उत्‍कृष्‍ट कार्य हेतु सम्‍मानित किया गया। इस अवसर पर मेरे उद्बोधन और काव्यपाठ को सर्वाधिक सराहना मिली ।
अमेरिका में पुलिसकर्मियों को यह कहने में बडा़ फख्र होता है "I am always with you, men in blue" और इंग्‍लैण्‍ड में तो पुलिस को प्‍यार से "बॉबी'' कहते है। हिन्‍दुस्‍तान में ऐसा नहीं होता है, यहॉ माताएं अपने बच्‍चों को दूध पिलाते वक्‍त कहती हैं, जल्‍दी से दूध पी लो, नहीं तो पुलिस पकड़ कर ले जायेगी। यूरोप, अमेरिका और अधिकांश विकसित देशों में पुलिस एक सप्‍ताह में 32 घंटे काम करती है और उन्‍हें सप्‍ताह में 3 या 4 दिन का अवकाश भी मिलता है। भारत में पुलिसकर्मी एक सप्‍ताह में 90 से 120 घंटे तक काम करते है और सप्‍ताह की तो छोडिये, महीनों में कई बार कोई अवकाश नहीं मिलता है। जब भी हमारे तीज, त्‍यौहार, जुलूस, धरने प्रदर्शन होते हैं तो पुलिस की ड्यूटी के घंटे और बढ़ जाते हैं। हमारे यहॉ रिवायत नहीं है कि जब सब कुछ शांति से निपट जाये तो हम पुलिस या थाने का शुक्रिया अदा करें, वरन् कहीं अगर एक घटना या दुर्घटना हो जाती है तो लोग आसमान सर पर उठा लेते है। हमारे समय का सिनेमा, थियेटर, साहित्‍य और मीडिया पुलिस कि गलतियॉ ढूढ़ने, तोहमत लगाने, उपहास करने और आलोचना करने में एक आनंद की अनुभूति करता है। जिस खाकी वर्दी को हर तरफ से कांटे ही मिलते हैं, उससे अपेक्षा की जाती है कि वह बदले मे मुस्‍कुराए और फूल दे।
'' काटे, पत्‍थर, नफरत, गाली, इनसे मेरी हस्‍ती है।
फूल, मोहब्‍बत, इज्‍जत, ताली जाने कैसी बस्‍ती है।। ''

दैनिक भास्‍कर और पत्रिका जैसे बड़े समाचार पत्रों तथा न्‍यूज-18 एवं स्‍वराज एक्‍सप्रेस जैसे तमाम् टी.वी. चैनलों ने उन जाबांज और शूरवीर पुलिस अधिकारियों को सम्‍मानित करने का बीडा़ उठाया है, जो समाज की सेवा और सुरक्षा में निष्‍काम तत्‍पर रहते हैं। उम्‍मीद् है कि हिन्‍दुस्‍तान में भी ऐसी बस्तियॉ बढ़ती जायेगी जो पुलिस को सम्‍मान और प्‍यार दे सके।
'' पूरी धरा भी साथ दे, तो और बात है,
पर तू जरा भी साथ दे, तो और बात है,
चलने को एक पांव से भी, चल रहे हैं लोग,
पर दूसरा भी साथ दे, तो और बात हैं।''

(पवन जैन)
ADG Police, MP

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