युग-युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल....

युग-युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल, प्रियतम का पथ आलोकित कर,
मधुर मधुर मेरे दीपक जल--------
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

इस बार की दिवाली 245 लोगों के लिए बेहद खास होगी, जो नेत्र ऑपरेशन के बाद ऑखों में नई रोशनी से दीपों की नई लौ देखेंगें। श्री बाबूलाल जैन सेवा संस्‍थान के इस 19वे प्रकल्‍प में डॉ. पुरेन्‍द्र भसीन के नेतृत्‍व में रतन ज्‍योति नेत्रालय, ग्‍वालियर के ऊर्जावान साथियों तथा डॉ. संजय शर्मा के नेतृत्‍व में परमार्थ सेवा न्‍यास मुरैना के दंत चिकित्‍सकों ने 5 दिवसीय इस नि:शुल्‍क चिकित्‍सा शिविर में सेवा की ऐसी अनूठी मिसाल कायम की, जिसे शब्‍दों मे व्‍यक्‍त करना असंभव है। देश के श्रेष्‍ठ रचनाकार डॉ. कुँवर बैचेन, भाई मुनव्‍वर राणा, डॉ. राहत इन्‍दौरी, सुश्री शबीना अदीब, सम्‍पत सरल, विनीत चौहान, डॉ. अनिल चौबे, रास बिहारी गौड, चौधरी मदन मोहन समर, तेजनारायण शर्मा, सुदीप भोला, गजेन्‍द्र प्रियांशु और रामबाबू सिकरवार जैसे प्रख्‍यात शायर और कवियों ने 27 अक्‍टूबर की शाम राजाखेड़ा और 28 अक्‍टूबर की शाम ग्‍वालियर में इन सेवाभावी चिकित्‍सकों के सम्‍मान में देर रात तक शब्‍दों का दीपदान किया। देश के शीर्षस्‍थ गीतकार डॉ. कुँवर बैचेन के शब्‍दों में – यह उनकी 60 साल की काव्‍य यात्रा का सबसे अविस्‍मर‍णीय पड़ाव था। व्‍यंग्‍यकार सम्‍पत सरल के नजरिये से यह देश के श्रेष्‍ठतम कवियों का विगत तीन दशकों का सबसे शानदार आयोजन था। अब तक राजाखेड़ा, ग्‍वालियर, मुरैना एवं आगरा में संस्‍थान द्वारा आयोजित 29 राष्‍ट्रीय कवि सम्‍मेलनों में देश के सैकड़ों प्रतिष्ठित कवियों एवं शायरों ने मरीजों और चिकित्‍सकों के सम्‍मान में न केवल शब्‍दों का दीपदान किया है वरन् लाखों लोगों को देश प्रेम और सामाजिक चेतना से ओत-प्रोत किया है।
यॅू तो दुनिया में सैकड़ों धर्म हैं, लेकिन सब धर्मों का सार यही है कि जो भी दूसरों के दुख में दुखी है या दूसरों की खुशी में सुखी है, वहीं मानव धर्म है, यही सच्‍ची इंसानियत और मानवता है। हमारे कुनबे के बड़े कवि कॅुवर बैचेन के शब्‍दों में –

''तुम्‍हारे दिल की चुभन भी जरूर कम होगी,
किसी के पॉव का काँटा निकाल कर देखो।''

आप सभी को दीपावली की अनंत शुभकामनाएँ।

''शूरवीरों का सम्‍मान''

दिनांक 16 जुलाई 2018 की शाम जबलपुर के मानस भवन में गृह मंत्री श्री भूपेन्‍द्र सिंह एवं पुलिस महानिदेशक श्री ऋषि कुमार शुक्‍ला द्वारा मध्‍यप्रदेश के 7 पुलिस अधिकारियों को उनके वीरता, प्रशिक्षण, अपराध अनुसंधान, सामुदायिक पुलिसिंग, यातायात प्रबंधन और अपराधों के खिलाफ मुहिम में उत्‍कृष्‍ट कार्य हेतु सम्‍मानित किया गया। इस अवसर पर मेरे उद्बोधन और काव्यपाठ को सर्वाधिक सराहना मिली ।
अमेरिका में पुलिसकर्मियों को यह कहने में बडा़ फख्र होता है "I am always with you, men in blue" और इंग्‍लैण्‍ड में तो पुलिस को प्‍यार से "बॉबी'' कहते है। हिन्‍दुस्‍तान में ऐसा नहीं होता है, यहॉ माताएं अपने बच्‍चों को दूध पिलाते वक्‍त कहती हैं, जल्‍दी से दूध पी लो, नहीं तो पुलिस पकड़ कर ले जायेगी। यूरोप, अमेरिका और अधिकांश विकसित देशों में पुलिस एक सप्‍ताह में 32 घंटे काम करती है और उन्‍हें सप्‍ताह में 3 या 4 दिन का अवकाश भी मिलता है। भारत में पुलिसकर्मी एक सप्‍ताह में 90 से 120 घंटे तक काम करते है और सप्‍ताह की तो छोडिये, महीनों में कई बार कोई अवकाश नहीं मिलता है। जब भी हमारे तीज, त्‍यौहार, जुलूस, धरने प्रदर्शन होते हैं तो पुलिस की ड्यूटी के घंटे और बढ़ जाते हैं। हमारे यहॉ रिवायत नहीं है कि जब सब कुछ शांति से निपट जाये तो हम पुलिस या थाने का शुक्रिया अदा करें, वरन् कहीं अगर एक घटना या दुर्घटना हो जाती है तो लोग आसमान सर पर उठा लेते है। हमारे समय का सिनेमा, थियेटर, साहित्‍य और मीडिया पुलिस कि गलतियॉ ढूढ़ने, तोहमत लगाने, उपहास करने और आलोचना करने में एक आनंद की अनुभूति करता है। जिस खाकी वर्दी को हर तरफ से कांटे ही मिलते हैं, उससे अपेक्षा की जाती है कि वह बदले मे मुस्‍कुराए और फूल दे।
'' काटे, पत्‍थर, नफरत, गाली, इनसे मेरी हस्‍ती है।
फूल, मोहब्‍बत, इज्‍जत, ताली जाने कैसी बस्‍ती है।। ''

दैनिक भास्‍कर और पत्रिका जैसे बड़े समाचार पत्रों तथा न्‍यूज-18 एवं स्‍वराज एक्‍सप्रेस जैसे तमाम् टी.वी. चैनलों ने उन जाबांज और शूरवीर पुलिस अधिकारियों को सम्‍मानित करने का बीडा़ उठाया है, जो समाज की सेवा और सुरक्षा में निष्‍काम तत्‍पर रहते हैं। उम्‍मीद् है कि हिन्‍दुस्‍तान में भी ऐसी बस्तियॉ बढ़ती जायेगी जो पुलिस को सम्‍मान और प्‍यार दे सके।
'' पूरी धरा भी साथ दे, तो और बात है,
पर तू जरा भी साथ दे, तो और बात है,
चलने को एक पांव से भी, चल रहे हैं लोग,
पर दूसरा भी साथ दे, तो और बात हैं।''

(पवन जैन)
ADG Police, MP

ढूंढती है फिर नया विश्‍वास ये आँखें....................

पूज्‍य पिताजी की पावन स्‍मृतियों में बाबूलाल जैन सेवा संस्‍थान के 19 वें नि:शुल्‍क चिकित्‍सा एवं नेत्र तथा दंत ऑपरेशन के शिविर का शुभारंभ पूज्‍य माताश्री श्रीमति कुसुम देवी जैन एवं मुख्‍य अतिथी श्री प्रदीप जैन (पी.एन.सी.), अध्‍यक्ष, अखिल भारतीय जैन सेवा न्‍यास द्वारा जैन धर्मशाला राजाखेड़ा में 27 अक्‍टूबर 2019 को किया गया । मानव सेवा का यह सिलसिला वर्ष 2001 से अनवरत् जारी है और राजस्‍थान, मध्‍यप्रदेश तथा उत्‍तर प्रदेश के 50000 से अधिक मरीजों को प्रत्‍यक्ष रूप से लाभ पहुँचाकर मानवता की सेवा का यह यज्ञ निरंतर जारी है । करवा चौथ के शुभ दिन प्रारंभ हुए इस शिविर में 2400 से अधिक मरीजों का परीक्षण किया गया । 245 चयनित लोगों के ऑपरेशन देश के प्रख्‍यात नेत्र चिकित्‍सक डॉ. पुरेन्‍द्र भसीन के हाथों रत्‍न ज्‍योति नेत्रालय, ग्‍वालियर में किये गये और 350 से अधिक दांतों के ऑपरेशन डॉ. संजय शर्मा के नेतृत्‍व में राजाखेड़ा में ही किये गये।
900 लोगों को केम्‍प में ही चश्‍में बनाकर वितरित किये गये तथा पूरी तरह दंत विहीन हो चुके 37 लोगों की नई बत्‍तीसी भी परमार्थ सेवा न्‍यास, मुरैना के दंत चिकित्‍सकों द्वारा बनाई गई। ''सर्वे भवन्‍तु सुखिन:, सर्वे संतु निरामय:'' के इस पुनीत महायज्ञ में दिल्‍ली के जैन युवा क्‍लब के 100 से अधिक नौजवानों ने शिविर में फल वितरण एवं व्‍यवस्‍था की पूरी जिम्‍मेदारी संभाली तथा 28 अक्‍टूबर की सुबह प्रांगण में स्थित जैन मंदिर में 24 तीर्थकरों का पावन अभिषेक भी किया। परम पिता परमेश्‍वर से प्रार्थना है कि चंबल के इस अंचल में ही नहीं वरन् संपूर्ण विश्‍व में मानवता की ऐसी असंख्‍य लौ निरंतर जलती रहे।
हर शिविर के साथ यही कामना और भावना रहती है कि कल के अखबारों की सुर्खियों का दौर बदल जाये, अखबारों में खबरें न हों आतंकी विस्‍फोट की, किसी प्राकृतिक आपदा की, वरन् खबर हो कि अब हमारे चिकित्‍सकों ने स्‍वास्‍थ्‍य और सेवा के ऐसे मंदिर बनाये हैं, जहाँ पीडि़तों की हर बीमारी का समुचित ईलाज सम्‍भव है । कल के अखबारों में खबरें न हों कातिलों की, दरिदों की, वहशियों की, खबरें हों उनकी, जिन्‍होंने किसी विकलाँग को सबलाँग बनाया हो, किसी डूबते को बचाया हो और किसी अन्‍धे को आँखों की रोशनी दी हो। एक कवि के शब्‍दों में...............

''ढूँढती है फिर नया विश्‍वास ये आँखें,
वेदना पढती कभी परिहास ये आँखें,
जिंदगी को और कुछ करवट बदलने दो,
फिर रचेगी सृष्टि का इतिहास ये आँखें।''

14 वें निःशुल्क चिकित्सा एवं नेत्र तथा दंत ऑपरेशन शिविर

बाबूलाल जैन सेवा संस्थान के 14 वें निःशुल्क चिकित्सा एवं नेत्र तथा दंत ऑपरेशन शिविर में शुभारम्भ की संध्या बेला में दि. 17 अक्टूबर को मरीजोंके सम्मानार्थ राजाखेड़ा में तथा समापन की पूर्व संध्या में दि. 18 अक्टूबर को मुरैना में ’’काव्य निशा’’ का आयोजन किया गया। दि. 18 अक्टूबर की शाम अन्तर्राष्ट्रीय कवि पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा की अध्यक्षता में मानव सेवी चिकित्सकों डॉ. पुरेन्द्र भसीन, डॉ. पुनीत रस्तोगी, डॉ. नीरज शक्ति निगम एवं डॉ. संजय शर्मा सहित सेवा संस्थान के न्यासी श्री गोपी मंधान व श्री संजय गुप्ता का नागरिक अभिनन्दन मुरैना के अग्रसेन पार्क में किया गया। सिद्धहस्त संचालक श्री दिनेश दिग्गज के संचालन में राजाखेड़ा में 7000 तथा मुरैना में 15000 श्रोताओं की तालियों ने देर रात तक पूरे शहर को गूंजायमान रखा। पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा, श्री अरूण जैमिनी, डॉ. सर्वेश अस्थाना, वरिष्ठ गीतकार रामेन्द्र मोहन त्रिपाठी, डॉ. कीर्ति काले, श्री गजेन्द्र सोलंकी, श्री संजय झाला, श्री मदन मोहन समर, सुश्री रूचि चतुर्वेदी, श्री चिराग जैन, श्री तेज नारायण बैचेन , श्री रामबाबू सिकरवार और शायरा शबनम अली ने अपने रचना पाठ से राजाखेड़ा और मुरैना के काव्य प्रेमियों का भरपूर रसास्वादन किया । मेरी 35 साल की काव्य यात्रा में मुरैना का कवि सम्मेलन निःसंदेह सबसे शानदार और यादगार था। संपूर्ण चम्बल अंचल को संस्था के इन कवि सम्मेलनों का इन्तजार रहता है, जिस में देश के दर्जनो नामी-गिरामी कवि प्रति वर्ष मरीजोंऔर चिकित्सकों के सम्मान में न सिर्फ शब्दों का दीपदान करते हैं, वरन् लाखों लोगों को देश प्रेम और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत करते हैं ।
यों तो चम्बल की पहचान अतीत में बीहड़ों , बागी और बंदूकों से रही है । दस्यु सुन्दरी पुतलीबाई से लेकर पान सिंह तोमर के किस्से फिल्मों में ही नहीं, वहां के जन-जीवन में रचे बसे हैं, पर अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल की इस पावन भूमि की अब नई तस्वीर भी पूरे देश के सामने आ रही है । अब चंबल माटी के 50,000 से ज्यादा सपूत भारतीय सेना , अर्द्ध सैनिक बलों और पुलिस बलों में तैनात होकर राष्ट्र सुरक्षा के लिये समर्पित हैं। युद्ध चाहे चीन के साथ हो या पाकिस्तान के साथ, कारगिल की लड़ाई हो या सीमा की सुरक्षा, इस वीर भूमि के सपूत मातृभूमि की रक्षा के लिये सबसे पहले अपना शीश दान करते हैं। पिछले दिनों ही मुरैना का एक सैनिक हवलदार मुकेश शर्मा श्रीनगर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुआ है । इन अमर शहीदों को शत्-शत् नमन ।
’’ कौन कहता है सो गये हो तुम,
सारे वतन के हों गये हो तुम । ’’
( पवन जैन )
प्रबंध न्यासी,बाबूलाल जैन सेवा संस्थान

आई.पी.एस. सर्विस मीट- 2016

पहली-पहली 3 दिवसीय आई.पी.एस. सर्विस मीट- 2016 मेरे 29 वर्षीय सेवाकाल का सबसे अविस्मरणीय आयोजन था। 250 से अधिक मध्यप्रदेश काडर के सेवारत एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठतम अधिकारियो ने अपनी सहभागिता, शुभकामनाओ, भावनाओ, स्नेह और अपनेपन की इतनी बारिश की, कि मेरे पास साथियों का तहेदिल से आभार व्यक्त करने के लिये कोई शब्द ही नहीं है। शुरूआत से पहले तो चिन्ता की तमाम् लकीरे थी, लेकिन अभूतपूर्व सामूहिक प्रयासों ने आयोजन को इतनी ऊंचाईयों दी कि यह एहसास हो रहा है, कि वाकई कोई ठोस रूप-रेखा बनाई गई थी ।

’’ मैंने तो यूँ ही रेत पर घुमाई थी अंगुलियाँ
गौर से देखा तो तस्वीर बन गई ।’’

’’ बेहतर मध्यप्रदेश, सुरक्षित मध्यप्रदेश’’ की विषय-वस्तु पर केन्द्रित इस संगोष्ठी की शुरूआत ही माननीय मुख्यमंत्री महोदय के भावपूर्ण उद्बोधन से हुई और फिर पुलिस मुख्यालय से लेकर पुलिस आफिसर मैस तक और लाल परेड के खेल मैदान से केरवा डेम तक मेरी स्मृतियों मैं ऐसे सेकड़ो पल हैं, जो ताउम्र मेरे साथ रहेंगे । बहुत सारे साथियोंने मुझे और मेरी टीम को बधाईयाँ दी हैं। हकीकत तो यही है दोस्तों, कि इमारते कंगूरे और शैल शिखर तो दूर से नजर आते है लेकिन नींव की ईंट को लोग देख नहीं पाते हैं । इस सम्पूर्ण आयोजन के समन्वय और आकल्पन मैं हमारी नींव की ईंट आदरणीय श्री संजय राणा, श्री के.एन.तिवारी, सुश्री अरूणा मोहन राव, श्री सुजाय थाउसेन, श्री कैलाश मकवाणा, श्री अजय शर्मा, श्री मकरन्द देवस्कर और भापुसे संघ के सचिव श्री के.बी.शर्मा ही थे और बधाई के प्रथम हकदार भी हमारे ये समस्त आधार स्तम्भ ही हैं ।

सुश्री रूचिवर्धन, श्री इरशाद वली, श्री सचिन अतुलकर, श्री रूडोल्फ, श्री गौरव तिवारी और आबिद खान जैसे दर्जनों युवाओ की ऊर्जा हमे आश्वस्त करती है कि मिलने-मिलाने का यह सिलसिला थमेगा नहीं -

’’ धरा पर जोर से बरसी,
मगर फिर छंट गई बदली,
उजाले कम नहीं होंगे,
यह कहकर धूप फिर निकली ।’’

फिर एक बार, कोटि-कोटि आभार ।
पवन जैन
अध्यक्ष,
भारतीय पुलिस सेवा संघ, म.प्र.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथी

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथी 30 जनवरी को भोपाल में कवि सम्राट पदमभूषण नीरज जी के सम्मान में आयेाजित कवि सम्मेलन में मेरी बापू को समर्पित रचना ''कटघरे में राष्ट्रपिता '' को विशेष सराहना मिली । टी. वी. एकंर, अभिनेता एवं कवि शैलेष लोढा के साथ भी 7 फरवरी को मेरी कविता की जुगलबंदी महावीर इंटरनेशनल, नई दिल्ली के रंगारंग कार्यक्रम में हजारों श्रेताओं का मुख्य आकर्षण रही ।
मित्रों, दुनिया में शायद ही कोई दूसरा मुल्क होगा जिसने अपने राष्ट्रनिर्माता एवं मुल्क को आजादी दिलाने वाले महानायक को इतनी आसानी से भुला दिया हो। आज के दौर में जब कुछ लोग गांधी के कातिलों का महिमामंडन करने पर आमादा है तब मेरी यह रचना उन सभी को समर्पित है जिनके दिलों में गांधी एवं गांधीगिरी जिदां है ।
‘‘ कल को जमाना शायद, नही मानेगा ये बाते,
हजारों संगीन के सम्मुख, महज कंकाल की छाती,
झुकी थी कायरी उनकी, कि ऐसी वीरता उसकी,
कोई गर शूल भी फेके, तो फूलों के माफिक हो ’’

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